सुथार समाज संस्थान सांचौर आपका हार्दिक स्वागत करता हैं।

सांचौर के हर क्षेत्र में सुथार समाज के लोग अच्छी खासी संख्या में लम्बे समय से निवास कर रहे हैं समाज की कई संस्थाए भी सुचारू रूप से अपने अनुसार समाज हित में कार्य कर रही है यह सभी होते हुए भी हमारी संख्या बल की हमें अधिकारिक अभी तक जानकारी नहीं है इस सोच के साथ हमने समाज के सक्रिय व्यक्तियों के साथ विचार विमर्श कर निर्णय लिया की हमें सांचौर मे निवास कर रहे सुथार समाज परिवारों की जानकारी प्राप्त कर सुचना को वेबसाइट के माध्यम से प्रसारित करनी चाहिए एवं बाद में इसे स्मारिका के रूप मे छापकर समाज में वितरित करनी चाहिए जिससे समाज बंधुओ को एक दुसरे की जानकारी मिल सके
  • एक डिजिटल समाज

    • डिजिटल समाज भारत की तस्वीर बदलेगा। आज दुनिया के विकसित देश डिजिटल हो गए है हमें भी दुनिया के साथ कदम से कदम मिलकर चलना है।
  • डिजिटल भारत

    • डिजिटल इंडिया भारत सरकार की एक पहल है जिसके तहत सरकारी विभागों को देश की जनता से जोड़ना है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बिना कागज के इस्तेमाल के सरकारी सेवाएं इलेक्ट्रॉनिक रूप से जनता तक पहुंच सकें।आगे पढ़े
  • सदस्यगण का दृढ़ संकल्प

    • आज के बदलते वैश्विक सामाजिक परिदृश्य में जांगिड सुथार समाज को विकास की मुख्य धारा में लाने हेतु अपने कौशल एवं शिक्षा के बल पर उन्नति का संकल्प लेते हैं।
  • संकल्प ही शक्ति हैं...

    • हमारे जीवन में संकल्प शक्ति का बहुत ही बड़ा महत्व है । इसी से व्यक्ति के जीवन का निर्माण होता है, व्यक्ति अपने जीवन को ही परिवर्तन करके नया रंग भर सकता है, निम्न स्तर से व्यक्ति महान बन जाता है।आगे पढ़े
  • समाज के श्रेष्ठ परिणाम

    • सुथार समाज सेवा संस्थान सांचौर आपके उज्जवल, सुखद, स्वस्थ्य एव दीर्घायु होने की कामना करता हैं। 'किसी भी समाज का उत्थान केवल शिक्षा से ही हो सकता है।
  • समाज में शिक्षा

    • शिक्षा मनुष्य के अंदर अच्छे विचारों को भरती है और अंदर में प्रविष्ठ बुरे विचारों को निकाल बाहर करती है। शिक्षा मनुष्य के जीवन का मार्ग प्रशस्त करती है। यह मनुष्य को समाज में प्रतिष्ठित करने का कार्य करती है। आगे पढ़े

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Suthar Samaj Sansthan Sanchore

विश्वकर्मा वंश : विश्वकर्मा वंश कहीं-कहीं भृगु कुल से और कहीं अंगिरा कुल से संबंध रखते हैं। इसका कारण है कि हर कुल में अलग-अलग विश्वकर्मा हुए हैं। हमारे देश में विश्वकर्मा नाम से एक ब्राह्मण समाज भी है, जो विश्वकर्मा समाज के नाम से मौजूद है। जांगीड़ ब्राह्मण, सुतार, सुथार और अन्य सभी शिल्पी निर्माण कला एवं शास्त्र ज्ञान में पारंगत होते हैं। यह ब्राह्मणों में सबसे श्रेष्ठ समाज है क्योंकि ये निर्माता हैं।
शिल्पज्ञ, विश्वकर्मा ब्राह्मणों को प्राचीनकाल में रथकार वर्धकी, एतब कवि, मोयावी, पांचाल, रथपति, सुहस्त सौर और परासर आदि शब्दों से संबोधित किया जाता था। उस समय आजकल के सामान लोहाकार, काष्ठकार, सुतार और स्वर्णकारों जैसे जाति भेद नहीं थे। प्राचीन समय में शिल्प कर्म बहुत ऊंचा समझा जाता था और सभी जाति, वर्ण समाज के लग ये कार्य करते थे।
 
विश्वकर्माSभवत्पूर्व ब्रह्मण स्त्वपराSतनुः। त्वष्ट्रः प्रजापतेः पुत्रो निपुणः सर्व कर्मस।।
 
अर्थ : प्रत्यक्ष आदि ब्रह्मा विश्वकर्मा त्वष्टा प्रजापति का पुत्र पहले उत्पन्न हुआ और वह सब कामों में निपुण था।
 
प्रभास पुत्र विश्वकर्मा, भुवन पुत्र विश्वकर्मा तथा त्वष्टापुत्र विश्वकर्मा आदि अनेक विश्वकर्मा हुए हैं। यहां बात करते हैं प्रथम विश्वकर्मा की जो वास्तुदेव और अंगिरसी के पुत्र थे। विश्वकर्मा के प्रमुख 5 पुत्र थे- मनु, मय, त्वष्टा, शिल्पी एवं दैवज्ञ। 
 
अगले पन्ने पर आठवां प्राचीन वंश...
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